सडक़ पर खड़ी बसों के कारण होता है ट्रेफिक जाम, जिम्मेदार नहीं कर रहे कार्रवाई
सड़क किनारे खड़ी हो रही बसें
सूरजपुर/जरही/भटगांव:- बस स्टैंड होने के बावजूद नगर में बसों का बस स्टैंड मे खड़ा नहीं होना, शासन और प्रशासन की जागरूकता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। इसे नगर का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि करीब 5 हजार से भी अधिक आबादी वाले भटगांव को अब तक बसो से होने वाली परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में जहां बसें खड़ी होती हैं, उसे भले ही बस स्टैंड कहा जाता हो। लेकिन वस्तुस्थिति यह है, कि वह सड़क है। स्कूल,हॉस्पिटल और तहसील कार्यालय के बीचोंबीच सड़क के दोनों ओर बसें खड़ी होती है। इस स्थान के आसपास कई कार्यालय स्थित है। जहां अनेक लोगों का रोजाना आना - जाना बना रहता है। इसके चलते आए दिन दुर्घटना की आशंका बनी रहती हैं। वहीं आवागमन प्रभावित होता है वह अलग।
16 लाख की लागत में बनाया गया था बस स्टैंड:
वर्ष 2007-2008 नगर पंचायत भटगांव के तात्कालिक अध्यक्ष जय राम राजवाड़े के अध्यक्ष काल में और तात्कालिक विधायक व संसदीय सचिव रामसेवक पैकरा के हाथों भूमि पूजन कर बनाया गया लगभग 16 लाख रुपए की लागत से बना बस स्टैंड पर बने काम्प्लैक्स में 8 शटर लगे हुए हैं, एक यात्री हाल वही एक टिकट घर बनाया गया है कांप्लेक्स में लगे शटर सड़कर टूटने लगे हैं। बुकिंग ऑफिस की खिड़की-दरवाजे की हाल दयनिय हो चुकी हैं वही बिल्डिंग में दरारें आ गई है और बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है वहीं कांप्लेक्स के 4 शटर खुले हुए हैं जहां सिर्फ आवारा पशुओं का डेरा रहता है और वहां का हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है की उस जगह को नशाखोरी के लिए भी उपयोग किया जाता हैं।
नए बस स्टैंड पर बस नहीं रुकने की वजह से नया बस स्टैंड खंडहर में हो चुका है तब्दील :
मेन रोड पर बसों के रुकने से लग रहा जाम :--
लगभग 2007-2008 में नए बस स्टैंड का लोकार्पण तत्कालीन विधायक व संसदीय सचिव रामसेवक पैकरा ने किया था। आज लगभग 15 साल बाद यानि एक दशक बीत जाने के बाद भी इस बस स्टैंड का संचालन नगर पंचायत भटगांव नहीं करा पा रहा है। बारिश और धूप के दिनों में यात्री खुले आसमान के नीचे बस का इंतजार करते रहते हैं। रोड पर बस खड़ी होने से जाम जैसे स्थिति बना रहती है। आज नया बस स्टैंड बने एक दशक हो गया है और बिना उपयोग किए कबाड़खाने में तब्दील हो जा रहा है, लेकिन न तो नगर पंचायत के वर्तमान अध्यक्ष सहित अधिकारी और न ही अन्य जनप्रतिनिधि इस तरफ ध्यान दे रहे हैं।
आधा दर्जन पब्लिक प्लेस हैं आसपासः
जिस स्थान पर बसें खड़ी होती है अथवा ठहरती है, उसके आसपास लगभग आधा दर्जन पब्लिक प्लेस है, जहां अपने रोजमर्रा के कामकाज से लोगों का आनाजाना बना रहता है। इन पब्लिक प्लेस में तहसील कार्यालय, अस्पताल, स्कूल, बैंक,नगर पंचायत, जल संसाधन ऑफिस का दफ्तर आदि शामिल है। स्वाभाविक है कि ऐसे स्थान पर बसों का ठहरना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
मरीजों की फजीहतः
चूंकि अस्पताल पास में ही है। इसलिए मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बसों की आवाजाही व शोरगुल से मरीजों को ट्रीटमेंट कराने में भी परेशानी आती है। वहीं बसों का और यात्रियों का शोरशराबा कितना ध्वनि प्रदूषण फैलाता होगा, इसे समझा जा सकता है।
दुर्घटना का अंदेशाः पब्लिक प्लेस से होकर गुजरने वाली बसों के आवागमन के कारण हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बसों के लगातार आते - जाते रहने से स्कूली विद्यार्थियों को भी यहां से निकलने में परेशानी होती हैं।
आवागमन होता है बाधितः
चालक द्वारा बसों को बस मार्ग पर ही रोकना और यात्रियों को बैठना एक बड़ी समस्या हो चुकी है ऐसे में जबतक सभी यात्रियों का चढ़ना तथा उतरना नहीं होता तबतक बस मार्ग पर बसे खड़ी रहने के कारण यातायात बाधित हो जाता है़ जिससे जरही से भटगांव या फिर दूसरी ओर से आने जाने वाले छोटे वाहन चालकों को रुकना पड़ता है ।

